गैंगस्टर्स और आतंकवादियों को जर्मनी, इटली और यूएसए से हो रही फंडिंग

गैंगस्टर्स और आतंकवादियों को जर्मनी, इटली और यूएसए से हो रही फंडिंग


चंडीगढ़. पंजाब सूबे में विभिन्न वारदातों काे अंजाम दे रहे गैंगस्टर्स और अातंकियाें को विदेशों से फंडिग हो रही है। पिछले दिनों तरनतारन में ड्रोन के जरिए पहुंचे हथियार व पैसे और जम्मू बॉर्डर पर भारी मात्रा में हथियारों के साथ गिरफ्तार आरोपियों से प्राथमिक पूछताछ में यह खुलासा हुआ है।

अब काउंटर इंटेलिजेंस अाैर ईडी मामले की जांच में जुट गई हैं। इसके लिए टीम ने दिल्ली समेत कई जगह छापे मारकर सात लोगों को राउंडअप किया है। इनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं।

इस बारे में डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों के लिए विदेशों से फंडिंग हो रही है। इसलिए इस मामले की गहनता से जांच की रही है, जिन लोगों को राउंडअप किया है, उनसे पूछताछ में कई खुलासे हो सकते हैं।

उसी आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। पूछताछ में पता चला है कि गैंगस्टर्स और आतंकियों को जर्मनी, इटली और यूएसए से फंडिंग हो रही है। वहां बैठे पूर्व आतंकी संगठनों के लोग इन्हें ये फंड मुहैया करवा रहे हैं। हालांकि ये फंड इन्हें लोकल लोगों से मिल रहे हैं।

इसलिए अब पुलिस ने सभी आरोपियों के खाते, उनके रिश्तदारों के खाते और इनसे जुड़े लोगों के खातों की भी जांच की जा रही है। इसके लिए पुलिस ईडी की सेवाएं भी लेगी। अभी पुलिस अपने स्तर पर इन सबकी जांच कर रही हैं। अगर ये मसला हल नहीं होता तो मामला एनआईए को सौंपा जा सकता है।

माझे के फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स से पूछताछ:विदेशों से हो रही फंडिंग मामले में पुलिस की अोर से इन दिनों माझे में फॉरेन एक्सचेंज डील करने वाले डीलर्स से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि इन लोगों तक पैसा किसके जरिये पहंुच रहा है अौर इनके तार कहां-कहां तक जुड़े हैं।

जांच के लिए चार टीमों का किया गठन:पुलिस ने अपने स्तर पर अभी चार टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें तरनतारन, अमृतसर, गुरदासपुर और दिल्ली के लिए बनाई गई हैं। इन टीमों ने अब तक सात लोगों को राउंडअप किया है। जिनसे पूछताछ चल रही है। इसके साथ ही पुलिस बॉर्डर एरिया के विभिन्न गांव में जांच कर रही है।

सात पाकिस्तानी सिम मिले:जो लोग पिछले दिनों ड्रोन के साथ पकड़े गए हैं, उनके पास से सात पाकिस्तानी सिम मिले हैं। इनकी भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि अगर इन सिम का पूरा डाटा मिल जाता है तो आतंकवादियों और गैंगस्टर्स के नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। इसके बाद बड़े आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा सकते हैं।

क्यों सौंपा जा सकता है एनआईए को मामला:यह माना जा रहा है कि पुलिस के पास फॉरेन फंडिंग की जांच करने के लिए पूरा मैकेनिज्म नहीं है। जबकि एनआईए नेशनल एजेंसी हैं। वह इंटरनेशनल लेवल पर किसी स्तर पर जांच कर सकती है। उसकी नोडल एजेंसी सीबीआई है और एनआईए बड़े स्तर पर मामले में पूछताछ कर सकती है। इसलिए यह मामला एनआईए को सौंपा जा सकता है


 

 

 

 

 

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