ट्रैक्टर की नंबरप्लेट वाली लूट की सियाज कार में आए बदमाश, 47 मिनट में ले उड़े 12 करोड़ का सोना

ट्रैक्टर की नंबरप्लेट वाली लूट की सियाज कार में आए बदमाश, 47 मिनट में ले उड़े 12 करोड़ का सोना

  • 3 महीने पहले दिल्ली हाईवे से लूटी गई थी यह गाड़ी, 19 दिन पहले घुमारमंडी में 2 करोड़ की लूट में इस्तेमाल तो अब फिर इसी में आए आरोपी
  • वारदात के बाद जाम में फंसी लुटेरों की गाड़ी, फिर मालेरकोटला रोड पर हुए फरार; लेकिन डेहलों तक सीसीटीवी कैमरों की जांच में नहीं दी दिखाई

लुधियाना. लुधियाना में सोमवार को आईआईएफएल गोल्ड लोन बैंक से 30 किलो सोना लूटने वाले लूट की सियाज गाड़ी में आए थे। यह गाड़ी तीन महीने पहले दिल्ली हाईवे से लूटी गई है। 19 दिन पहले यही गाड़ी यहां घुमारमंडी में 2 करोड़ की लूट की वारदात में इस्तेमाल की गई थी। इसी नंबर के साथ गाड़ी अंबाला के नजदीक नजर आई थी। अब फिर इसी को इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, इस पर जो नंबर प्लेट लगी है, वह किसी किसी अवतार सिंह के नाम से रजिस्टर्ड ट्रैक्टर का नंबर है। पुलिस के लिए यह घटना बहुत बड़ा चैलेंज है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पुलिस के हाथ अहम सुराग लगा है, पर हकीकत में अभी तक पुलिस के हाथ खाली ही हैं।

पंजाबी में बात कर रहे थे लुटेरे, बांध दिए सबके हाथ

लुधियाना के गिल रोड पर सीआईए-3 के ऑफिस से 100 फीट की दूरी पर स्थित आईआईएफएल गोल्ड लोन बैंक की ब्रांच में अंजाम दी गई इस वारदात में हासिल सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक लुटेरे सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर बैंक में घुसे और फिर सोना थैलों में भरकर 10 बजकर 30 मिनट पर आराम से गाड़ी में बैठकर निकल गए। कंपनी की महिला कर्मचारी ने बताया कि 10 बजे के बाद शाखा में पहुंची थी। तब मेन गेट खुला हुआ था। मैनेजर के कैबिन में पहुंची तो पिस्टल लिए एक लुटेरे ने मुझे पकड़ा और बंधक बनाए दूसरे मुलाजिमों के पास सिर नीचे करके बिठा दिया। मैनेजर के कैबिन समेत तीन अन्य जगह पर सिक्युरिटी अलार्म के बटन हैं। उसे भी दबाने नहीं दिया गया। मुलाजिमों के हाथ रस्सियों से बांधे थे। एक ने सिर पर मंकी कैप पहनी थी। बाकी ने हुड पहन रखे थे और मुंह पर कपड़ा बांधा था। आरोपी आपस में पंजाबी में बात कर रहे थे। उन्होंने मैनेजर से ही डिजिटल लॉक खुलवाया और लोहे की सेफ से नकदी और गहने लेकर फरार हो गए। वह काफी समय तक तो सहमे रहे। मैनेजर ने पड़ोसी दुकानदार और मालिक को सूचित कर गेट खुलवाया और सीधे सामने मौजूद सीआईए-3 के कार्यालय में गए। वहां मौजूद मुंशी को इस संबंधी जानकारी दी, जिसने इस संबंधी उच्च अधिकारियों को बताया और वह मौके पर पहुंचे।

ग्राहक के आने के बाद खुला था सेफ
बैंक में लगा सेफ का सिक्युरिटी सिस्टम मुख्य ब्रांच से ओटीपी आने के बाद ही खुलता है और इसके बाद उसी चार डिजिट के नंबर से पूरा दिन इसे खोला जा सकता है। सोमवार को भी फाइनांस कंपनी के कार्यालय में सुबह एक ग्राहक आया था, जो सोना देकर पैसे लिए और चला गया। उसी ग्राहक के आने के बाद इसे पहली बार खोला गया था।

250 से ज्यादा युवकों से पूछताछ
पुलिस सूत्रों की मानें तो इनपुट मिले हैं कि पहले वारदात करने वालों में सिर्फ डाइवर और रैकी करने वाले का इस्तेमाल किया गया है, जबकि तीन नए गुर्गों को शामिल किया गया है, जो डाबा-लोहारा, गयासपुरा के है। इसी आधार पर पुलिस ने 250 से ज्यादा युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इनमें से एक संदिग्ध की तस्वीर भी जारी की है, लेकिन उसे मीडिया में नहीं दिया गया।

लुधियाना से बाहर नहीं गई गाड़ी
पता चला है कि लुटेरों ने गिल चौक की तरफ गाड़ी दौड़ाई और फिर चौक से यू-टर्न लेकर जाम में फंसे। पुलिस ने वहां की फुटेज भी निकलवाई है। इसके मुताबिक बदमाश गाड़ी में भी चेहरे ढके नजर आए। पुलिस ने डेहलों तक सीसीटीवी कैमरों को चैक किया, लेकिन इनमें कहीं भी लूट में इस्तेमाल गाड़ी नजर नहीं आई। फिलहाल पुलिस यही मानकर चल रही है कि गाड़ी लुधियाना से बाहर गई ही नहीं है।

पंजाब से बाहर का हो सकता है गैंग का ऑपरेटर
दूसरी ओर लूट की वारदात पर गौर किया जाए तो 19 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र के नालासोपारा में गोल्ड सेंटर से 20 किलो सोना लूट लिया गया था। इसी तरह 9 जनवरी 2020 को गुजरात के बलसाड़ में भी आईआईएफएल की ब्रांच से भी 6 हथियारबंद लुटेरे 35 किलो सोना लूटकर फरार हो गए थे। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इन दोनों बड़ी वारदातों का लुधियाना की इस वारदात के साथ जरूर कोई संबंध होगा। बहरहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

हर पहलू से जांच कर रही है पुलिस
इस बारे में एडीजीपी इंटरनल सिक्युरिटी आरएन ढोके और पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल का कहना है कि संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही गैंग के बाहर से होने के एंगल से जांच की जा रही है, वहीं इस बात भी पड़ताल की जा रही है कि इस वारदात में कंपनी के कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।

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