पंजाब में स्कूल फीस मामले को लेकर अभिभावकों को धमकाने का सिलसिला बदस्तूर जारी..

पंजाब में स्कूल फीस मामले को लेकर अभिभावकों को धमकाने का सिलसिला बदस्तूर जारी..

*_निजी स्कूल संचालक माननीय उच्चतम न्यायालय से ऊपर कैसे :-डायरेक्टर “सारस”_*

 

Mbdwebnews : पंजाब में एक बार फिर निजी स्कूलों द्वारा लूट खसोट का मामला गरमाने लगा है. निजी स्कूलों ने एक बैठक कर अभिभावकों को डराने धमकाने की अपनी नई कार्ययोजना पर 10 सितम्बर तक अमल करने का मन बना लिया है,जिससे अभिभाववक वर्ग में काफ़ी रोष देखा जा रहा है.अगर तो स्कूलों का यही रवैया रहा तो लाचार और बेवश अभिवावकगण आंदोलन करने को मजबूर होंगे जिसकी जिम्मेद्दार सरकार और स्कूल प्रशासन होगी. उक्त विचार “सर्व अधिकार रक्षा अभियान समिति”(सारस)के डायरेक्टर एस. के. चौधरी ने साँझा किये हैँ.

उन्होंने निजी स्कूलों को आगाह किया है की वह फीस स्ट्रक्चर(ट्यूशन फीस) को पारदर्शी बनाये वगैर अभिभावकों को धमकाना बंद करें और माननीय हाईकोर्ट के फैसलों को तोड़ मरोड़कर परोसना बंद करें. उन्होंने आगे कहा की शिक्षा के मंदिर को व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने के भ्रम में संस्थानों को यह नहीं भूलना चाहिए की राइट टू एजुकेशन पॉलिसी के तहत वह किसी भी बच्चे को स्कूल से नहीं निकाल सकते हैँ फिर बार बार नाम काटने की धमकी क्यों…? अगर कोई अभिभावक बच्चों के  ऑनलाइनलाइन पढ़ाई को लेकर संतुष्ट नहीं है,या फिर बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो ऐसे में स्कूलों की फीस को लेकर धक्केशाही को जायज नहीं ठहराया जा सकता है. चौधरी  ने आगे बताया की अभिभावकों  के एकजुट होने का वक्त आ गया है. पेरेंट्स के एकजुट हुये वगैर हम यह लड़ाई नहीं जीत सकते हैं. अभिभावक वर्ग अपनी विवशताओं का जिक्र करते हुये स्कूलों को आवेदन पत्र सौपने में देरी न करें और याद रखें की कोई भी स्कूल फीस को आधार बनाकर उनके बच्चों का नाम नहीं काट सकती है.उन्होंने निजी स्कूलों से भी गुजारिश की है की लॉकडाउन और उसके बाद के हालातों को  मद्देनजर रखते हुये पेरेंट्स को परेशान न किया जाए, और उनकी फीस नहीं देने की मजबूरीयों को गौर से सुना जाए.

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