Alert: जानिए किस राज्य में बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र ने भेजीं 30 स्पेशल टीमें, वैक्सीन का डोज भी खत्म होने की कगार पर, सेना कर रही है मरीजो की मदद

Alert: जानिए किस राज्य में बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र ने भेजीं 30 स्पेशल टीमें, वैक्सीन का डोज भी खत्म होने की कगार पर, सेना कर रही है मरीजो की मदद 

महाराष्ट्र में कोरोना महामारी का संक्रमण तेजी से अपने नए पीक की ओर बढ़ रहा है। यहां बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने 30 विशेषज्ञ मेडिकल टीमें अलग-अलग जिलों के लिए रवाना की हैं। कोरोना विशेषज्ञों की ये टीम राज्य में कोविड से जूझ रहे अधिकारियों को कोरोना कंट्रोल के लिए रणनीति बनाने में मदद करेंगे। इस बीच राज्य में वैक्सीन डोज खत्म होने की कगार पर हैं। राज्य सरकार के मुताबिक अब यहां केवल एक से दो दिन का ही डोज बचा है।

पिछले 24 घंटे में अब तक के सबसे ज्यादा 59,907 मामले सामने आए। इसके साथ ही कुल केस बढ़कर 31,73,261 हो गए। राज्य इस दौरान 322 कोरोना संक्रमितों की मौत दर्ज की गई। महाराष्ट्र में कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या अब 56,652 पर पहुंच गई।

महाराष्ट्र में खत्म होने वाला है वैक्सीन का स्टॉक
प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास ने बताया कि बुधवार की सुबह तक राज्य में करीब 14 लाख वैक्सीन डोज थी। कई जिलों में आज या कल तक स्टॉक खत्म हो जाएगा। केंद्र को इस बात की जानकारी है और हमने लिखित में उन्हें बताया है।’ उन्होंने बताया कि अगर शेड्यूल और वैक्सीन की उपलब्धता हो तो महाराष्ट्र में रोज आसानी से पांच लाख शॉट दिए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने भी बताया कि राज्य को 40 लाख डोज एक सप्ताह में जरूरी है। हम दिन 4-5 लाख लोगों को वैक्सीन दे रहे हैं, ऐसे में अगर वैक्सीन नहीं मिली तो बड़ी समस्या हो सकती है। टोपे ने कहा, ‘हम सेंटर के 6 लाख डोज हर दिन लगाने के चैलेंज को स्वीकार करते हैं, लेकिन वैक्सीन होनी तो चाहिए।’

स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा- महाराष्ट्र के लोगों संग हो रहा भेदभाव
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने गुरुवार को कहा- कुछ देर पहले मेरे पास वॉट्सऐप पर एक मैसेज भेजा गया है, इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार हमें सिर्फ 7.5 लाख वैक्सीन के डोज दे रही है। जबकि उत्तर प्रदेश को 48 लाख, मध्यप्रदेश को 40 लाख और अन्य राज्यों को भी लगभग इतनी ही डोज दी गई है। मेरा सवाल यह है कि महाराष्ट्र के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

इस मामले को लेकर मैंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से तुरंत बात की। NCP चीफ शरद पवार ने भी उनसे बात की। मैंने उन्हें बताया कि 12 करोड़ की जनसंख्या के लिए यह वैक्सीन कहां तक उचित है? इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मुझे आश्वासन दिया है कि इस मामले में जल्द करेक्शन किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री टोपे ने कहा कि हर महीने 1.6 करोड़ और हर सप्ताह 40 लाख वैक्सीन की डोज चाहिए। हम चाहते हैं कि दूसरे देशों को मदद करने की जगह केंद्र सरकार महाराष्ट्र की मदद के लिए आगे आए। केंद्र सरकार हमें मदद कर रही है लेकिन जैसी हमें चाहिए वैसी नहीं। गुजरात की जनसंख्या महाराष्ट्र से आधी है और वहां पर 1 करोड़ वैक्सीन की डोज दी गई है, जबकि महाराष्ट्र के लिए सिर्फ 1.04 लाख ही दी गई है। उन्होंने कहा कि हम रेमडेसिविर की कालाबाजारी रोकने के लिए सीधे इसकी निर्माता कंपनी से बात कर रहे हैं।

संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए धारावी में फिर से टेस्टिंग तेज हुई है।
संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए धारावी में फिर से टेस्टिंग तेज हुई है।

पुणे में 20 बेड देने को तैयार हुई इंडियन आर्मी
पुणे में कोरोना इस हद तक कंट्रोल से बाहर हो गया है कि जिला प्रशासन ने भारतीय सेना से मदद मांगी थी। पुणे में वैंटिलेटर्स और ऑक्सीजन बेड्स फुल हो चुके हैं। नए मरीजों को रखने के लिए बेड्स नहीं हैं। ऐसे में पुणे के आर्मी हॉस्पिटल को सामान्य नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने की मांग की गई। जिसे आर्मी ने मानते हुए 20 बेड्स देने की बात कही है।

पुणे में होटल किराए पर लेने की नौबत आई
पुणे में मरीजों को अस्पतालों में रखने की जगह नहीं हैं। उन्हें रखने के लिए होटलों को किराए पर लिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि सारे बेड्स पहले से ही फुल हो चुके हैं। पुणे में पिछले 15 दिनों में हर रोज चार हजार नए केस सामने आ रहे हैं। पुणे के रूबी अस्पताल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अस्पताल ने तीन होटल को किराए पर लिया है और वहां 180 बेड्स की व्यवस्था की जा सकी है। जो हाल रूबी अस्पताल का है वैसा ही हाल पुणे के सरकारी अस्पतालों और अन्य अस्पतालों का भी है।

महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की भारी किल्लत होने वाली है
राज्य की खाद्य और दवा नियामक (FDA) ने आने वाले दिनों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर आशंकाएं जाहिर की हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने FDA को यह सूचित किया है कि अप्रैल महीने के आखिर तक महाराष्ट्र में एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 9 लाख तक पहुंच सकती है। इसी के साथ ऑक्सीजन की मांग भी दोगुनी हो जाएगी। फरवरी महीने में महाराष्ट्र के अस्पतालों में जहां 150 से 200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी तो वहीं यह मांग मार्च के आखिर तक बढ़कर 650 से 750 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। 6 अप्रैल को महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की खपत बढ़कर 777 मीट्रिक टन पहुंच गई। महाराष्ट्र में प्रतिदिन ऑक्सीजन उत्पादन की अधिकतम क्षमता 1250 मीट्रिक टन है। फिलहाल महाराष्ट्र हर दिन 30 से 50 मीट्रिक टन ऑक्सीजन गुजरात से लेता है और जल्द ही छत्तीसगढ़ से भी उसे हर दिन 50 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिलेगा।

मुंबई में गाड़ियों को रोक कर एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है।
मुंबई में गाड़ियों को रोक कर एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है।

लॉकडाउन के लिए CM ने मांगा दो दिन का टाइम
राज्य में फिर से लॉकडाउन लगाए जाने से आक्रोशित व्यापारियों के साथ वर्चुअल बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लॉकडाउन के मुद्दे पर दो दिन का समय मांगा। उन्होंने कहा कि कुछ जिम्मेदारी व्यापारियों को भी उठानी होगी और उन्हें बढ़ते संक्रमण को रोकने और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि सभी को एकजुट होना चाहिए और इस लड़ाई को जीतने के लिए एक साथ काम करना चाहिए। सरकार का इरादा व्यापारियों का नुकसान करना नहीं बल्कि उनके हितों की रक्षा करना है, लेकिन यह स्थिति विकट है। इसलिए लॉकडाउन का कठोर निर्णय लेना पड़ रहा है।

9वीं और 11वीं के छात्रों को किया जाएगा प्रमोट
महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए साल भर से स्कूल बंद थे। राज्य में स्कूलों के अंदर ऑनलाइन तरीके से बच्चों को पढ़ाई करवाई जा रही थी। इस बार 11वीं कक्षा में एडमिशन की शुरुआत काफी देर से हुई थी। अब कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने ऐलान किया है कि नौवीं और 11वीं कक्षाओं के छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा। इससे पहले पहली से आठवीं तक के छात्रों को प्रमोट करने का आदेश सरकार ने दिया था।

सार्वजनिक स्थलों पर थूकने पर लगाई जाए रोक: अदालत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार और BMC को सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की समस्या पर रोक लगाने के लिए उपयुक्त कदम उठाने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने सड़क पर थूकने वालों के खिलाफ जुर्माने की राशि को 200 से बढ़ाकर 1200 करने को कहा। अदालत ने सवाल किया, ‘‘आजकल 200 रुपए का महत्व ही क्या है? आप राजस्व का नुकसान उठा रहे हैं। थूकने की यह आदत रोकने की जरूरत है।’’

सौजन्य:  दैनिक भास्कर

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