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भारत से लंदन भेजी गई ये सबसे खतरनाक मिर्च, DRDO ने बनाया है इससे मिर्ची बम

भारत से लंदन भेजी गई ये सबसे खतरनाक मिर्च, DRDO ने बनाया है इससे मिर्ची बम

 

 

 

इसकी खेती नागालैंड में ही होती है. नागालैंड सरकार को इस मिर्च के लिए साल 2008 में जीआई टैग यानी ज्योग्राफिकल इंडेक्स हासिल हुआ था. असम का तेजपुर और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम का इलाका भूत जोलोकिया की खेती के लिए मशहूर है.

भारत से लंदन भेजी गई ये सबसे खतरनाक मिर्च, DRDO ने बनाया है इससे मिर्ची बम
ये दुनिया की सबसे तीखी मिर्च है.

पूर्वोत्तर क्षेत्र के जीआई संबंधी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के मकसद से नागालैंड के ‘राजा मिर्च’, जिसे किंग चिली भी कहा जाता है, की एक खेप को बुधवार को हवाई मार्ग से गुवाहाटी के रास्ते लंदन निर्यात किया गया है. किंग चिली की इस खेप को स्कोविल हीट यूनिट्स (एसएचयू) के आधार पर दुनिया की सबसे तीखी भी माना जाता है. इस खेप को नागालैंड के पेरेन जिले के एक हिस्से, तेनिंग, से मंगवाया गया था और उसे गुवाहाटी में एपीडा से सहायता प्राप्त पैकहाउस में पैक किया गया था. नागालैंड की इस मिर्च को भूत जोलोकिया और घोस्ट पेपर भी कहा जाता है. इसे 2008 में जीआई सर्टिफिकेशन मिला था. आइए आपको दुनिया की इस सबसे तीखी मिर्च के बारे में बताते हैं.

वर्ल्‍ड रिकॉर्ड में आया है नाम

भुत जोलकिया दुनिया की दूसरे नंबर की सबसे तीखी मिर्च है. यह मैक्सिको की रेड सैविना मिर्च से भी दोगुनी तीखी तो कैयानिन मिर्च जिसे हाबैनेरो मिर्च के तौर पर जानते हैं, उससे तीन गुनी तीखी है. भुत जोलकिया को घोस्‍ट पैपर के नाम से भी जानते हैं. साल 2007 में इस मिर्च को गिनीज वर्ल्‍ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली थी. यह मिर्च उस समय टोबैसको सॉस से भी 400 गुना ज्‍यादा तीखी थी. डॉक्‍टर पॉल बोस्‍लैंड जिन्‍होंने इस मिर्च की खोज की थी, उनके मुताबिक इस मिर्च की एक सही मात्रा बहुत कम समय में किसी की भी जान ले सकती है. इस मिर्च का बायोलॉजिकल नाम कैपसिकम चीनेंस है.

साल 2008 में मिला GI टैग

इसकी खेती नागालैंड में ही होती है. नागालैंड सरकार को इस मिर्च के लिए साल 2008 में जीआई टैग यानी ज्योग्राफिकल इंडेक्स हासिल हुआ था. असम का तेजपुर और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम का इलाका भूत जोलोकिया की खेती के लिए मशहूर है. एक बार इस मिर्च की खेती ग्वालियर में की गई मगर तो वो जरा भी तीखी नहीं थी. भूत जोलोकिया की फसल ज्यादा बारिश में खराब हो जाती है, बिल्कुल बारिश न हो तो भी सूख जाती है. पक जाने के बाद भूत जोलोकिया का आकार 6 से 8 सेंटीमीटर का होता है. अक्सर यह पकने पर लाल रंग की होती है, पर कभी कभी संतरा और चाकलेट के रंग की भी दिखाई देती है.

मिर्ची से बना हथियार

भूत जोलोकिया मिर्च सिर्फ खाने का स्‍वाद बढ़ाती हो ऐसा नहीं है. इस मिर्च का प्रयोग हथियार के तौर पर भी करते हैं. यह नागा व्यंजन का जरूरी हिस्सा है. चटनी और सब्जियों का स्वाद बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. नागा रेसिपी में पोर्क, सूखी मछली से बने व्‍यंजन इस मिर्च के बिना अधूरे हैं. साल 2009 में डिफेंस रिसर्च डिजाइन ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने भूत जोलोकिया के हैंड ग्रेनेड में इस्तेमाल पर विचार किया. तेजपुर स्थित डीआरडीओ की लैब ने इस मिर्च से प्रेरित होकर एक चिली ग्रेनेड या मिर्ची बम बनाया था. वहीं, साल 2016 में पैलेट गन में भी इसके इस्तेमाल के प्रस्ताव पर विचार किया गया, जिससे कि उग्रवादियों को तुरंत तितर-बितर किया जा सके.

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