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Income Tax: कितने मकान हैं आपके नाम? टैक्स की देनदारी का नया नियम जानिए

Income Tax: कितने मकान हैं आपके नाम? टैक्स की देनदारी का नया नियम जानिए

 

कोई भी व्यक्ति खुद के कब्जे वाले घर की संपत्ति (self-occupied house properties) के रूप में दो मकानों पर छूट प्राप्त कर सकता है. दो के बाद जो भी मकान की संपत्ति होगी ‘डीम्ड लेट आउट’ प्रोपर्टी में रखा जाएगा और उसी के हिसाब से टैक्स की देनदारी बनेगी.

Income Tax: कितने मकान हैं आपके नाम? टैक्स की देनदारी का नया नियम जानिए
मकान पर क्या है टैक्स का नियम (सांकेतिक तस्वीर)

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल की तारीख नजदीक आ रही है. हाउस प्रॉपर्टी को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं. ऐसा ही एक सवाल है कि किसी व्यक्ति और उसके परिजनों के नाम तीन मकान हैं और उन सभी मकानों में उनका परिवार रहता है. कोई मकान किराये पर नहीं चढ़ाया गया है. ऐसे में क्या वित्त वर्ष 2019-20 के लिए टैक्स की देनदारी बनेगी?

इसके बारे में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि एसेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए टैक्स की देनदारी बनेगी. नियम के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति खुद के कब्जे वाले घर की संपत्ति (self-occupied house properties) के रूप में दो मकानों पर छूट प्राप्त कर सकता है. दो के बाद जो भी मकान की संपत्ति होगी ‘डीम्ड लेट आउट’ प्रोपर्टी में रखा जाएगा और उसी के हिसाब से टैक्स की देनदारी बनेगी. यानी कि दो हाउस प्रोपर्टी के बाद तीसरे को डीम्ड प्रोपर्टीज मानते हैं. 2019 के बजट से पहले सिर्फ एक मकान के बाद दूसरे को ही डीम्ड माना जाता था. लेकिन अब यह दर्जा तीसरे मकान को दे दिया गया है. जिन दो मकानों में आप रहते हैं, उन पर रेंटल इनकम जैसी कोई बात नहीं होगी और टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन तीसरा मकान इस श्रेणी में आएगा.

फार्महाउस का क्या है नियम

ऐसा ही एक सवाल है कि किसी व्यक्ति के पास दो मकान हैं. इसमें एक फार्महाऊस है जिसमें वे वीकेंड पर जाते हैं. दूसरा मकान शहर में है जहां वे हफ्ते के 5 दिन रहते हैं. क्या दोनों प्रोपर्टी को सेल्फ ऑक्युपाइड की श्रेणी में रखा जाएगा? इनकम टैक्स के मुताबिक दोनों प्रॉपर्टी को खुद के कब्जे वाली संपत्ति नहीं मान सकते और टैक्सू छूट की सुविधा नहीं ले सकते. इसमें एक मकान सेल्फ ऑक्युपाइड माना जाएगा जिस पर टैक्स की छूट ले सकते हैं. लेकिन दूसरा मकान डीम्ड लेट आउट प्रॉपर्टी में आएगा. इसी हिसाब से इस पर टैक्स की देनदारी बनेगी.

दो फ्लोर के मकान का रूल

ऐसा भी होता है कि दो फ्लोर का मकान है जिसमें मालिक का परिवार पहले फ्लोर पर रहता है और ग्राउंड फ्लोर को किराये पर दिया है. इसमें टैक्स का रूल अलग है. ग्राउंड फ्लोर से बिजनेस यानी कि रेंट पर देकर कमाई हो रही है. इस हिसाब से यह ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ में नहीं आएगा. यानी कि दुकान की कमाई को मकान की कमाई से नहीं जोड़ सकते. दोनों का नियम अलग है.

ग्राउंड फ्लोर पर चलने वाली दुकान की कमाई को ‘बिजनेस प्रोफेशन’ के स्लैब में रखा जाएगा. उसी हिसाब से आपको आईटीआर में बताना होगा और जो टैक्स बनता है, उसकी अदायगी करनी होगी. इसके तहत आपको बिजनेस में होने वाले फायदे और घाटे को दिखना होगा. इससे अलग फर्स्ट फ्लोर सेल्फ ऑक्युपाइड प्रॉपर्टी के रूप में माना जाएगा और इस पर टैक्स की देनदारी नहीं होगी. इसमें आप खुद रहते हैं, इसलिए हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली कमाई को जीरो माना जाएगा.

इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी का अर्थ

अगर आपने ग्राउंड फ्लोर को किराये पर दिया है तो उस टैक्स चुकाना होगा. यह दुकान ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ के टैक्स के तहत आएगी. दुकान से होने वाली कमाई आपकी कमाई में शामिल होगी. इसमें आपको कुल किराये में दिए गए खर्च को घटाने होंगे. जैसे आप उस संपत्ति के लिए हाउस टैक्स या नगर निगम खर्च आदि देते हैं तो उसे घटाया जा सकता है. उसके बाद जो नेट कमाई होती है, उसको टैक्स की इनकम में शामिल किया जाता है.

किराये पर दी गई संपत्ति के मामले में धारा 24 (ख)​ के तहत कटौती का दावा करने के लिए ब्याज की मात्रा की कोई सीमा नहीं है. अगर आप दो घर के मालिक हैं और एक किराये पर दे रखा है. दूसरे घर में खुद रहते हैं तो एक घर में आय को शून्य माना जाएगा. जबकि दूसरे घर के मामले में उचित किराये को कमाई माना जाएगा और उसके बाद टैक्स के नियम लागू होंगे. इसी हिसाब से टैक्स चुकाना होगा.

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