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चर्चा चवन्नी, खर्चा रुपैया’ की तरह चल रहा काम, संसद में विपक्ष के हंगामें पर केंद्रीय मंत्री नकवी का तंज

चर्चा चवन्नी, खर्चा रुपैया’ की तरह चल रहा काम, संसद में विपक्ष के हंगामें पर केंद्रीय मंत्री नकवी का तंज

 

 

संसद ने लगभग 107 घंटों में से केवल 18 घंटे काम किया है. लगभग 89 घंटे काम करने का समय बर्बाद हो गया है. इसका मतलब यह है कि करदाताओं के पैसे का कुल नुकसान 133 करोड़ रुपए से अधिक है.

 

 

'चर्चा चवन्नी, खर्चा रुपैया' की तरह चल रहा काम, संसद में विपक्ष के हंगामें पर केंद्रीय मंत्री नकवी का तंज
केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी.

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Union Minister Mukhtar Abbas Naqvi) ने रविवार मानसून सत्र (monsoon session) के दौरान विपक्ष के हंगामें को लेकर बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में हंगामा करके कार्यवाही को बार-बार स्थगित कर रहा है, जोकि “चर्चा चवन्नी, खारचा रुपैया” की तरह है. मंत्री ने कहा कि बार-बार हंगामा होने के कारण करदाताओं के पैसे का नुकसान हुआ है.

नकवी ने कहा कि हंगामा रुकना चाहिए. विपक्ष को संसद में हंगामा रोकना चाहिए. सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह विपक्ष के किसी भी मुद्दे पर चर्चा या बहस के लिए तैयार है. इससे पहले विपक्षी दलों ने कहा था कि वे चाहते हैं कोरोना पर चर्चा हो लेकिन वह इससे भाग गए. फिर उन्होंने कहा कि वे किसानों के मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं और वह फिर से भाग गए.

“भगवान विपक्षी दलों को अच्छा ज्ञान दें”

संसद के दो सप्ताह के मानसून सत्र में 133 करोड़ रुपए के नुकसान की खबरों के बारे में पूछे जाने पर नकवी ने कहा ‘इस बार संसद में जो हुआ है, हम कह सकते हैं ‘चर्चा चवन्नी, खारचा रुपैया’ है. उन्हें हंगामा करने के बजाय चर्चा और बहस में भाग लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि भगवान विपक्षी दलों को अच्छा ज्ञान दें और वे एक उत्पादक सत्र के लिए चर्चा में भाग लें.

हंगामें के कारण बार-बार स्थगित हो रही कार्यवाही

किसान कानूनों, पेगासस स्पाईवेयर, कोविड-19 और महंगाई समेत कई मुद्दों पर विपक्ष द्वारा लगातार हो रहे हंगामे के कारण 19 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से संसद के दोनों सदनों का कामकाज बुरी तरह बाधित रहा. लोकसभा को संभावित 54 घंटों में से केवल सात घंटे काम करने की अनुमति दी गई है, जबकि राज्यसभा को संभावित 53 घंटों में से 11 घंटे काम करने की अनुमति दी गई है.

हंगामें के हुआ कारण करदाताओं का पैसा बर्बाद

अब तक संसद ने संभावित 107 घंटों में से केवल 18 घंटे काम किया है. लगभग 89 घंटे काम करने का समय बर्बाद हो गया है. इसका मतलब यह है कि करदाताओं के पैसे का कुल नुकसान 133 करोड़ रुपए से अधिक है. संसद के चल रहे मानसून सत्र में उच्च सदन की उत्पादकता में भारी गिरावट आई क्योंकि राज्य सभा सचिवालय ने एक आधिकारिक अधिसूचना में बताया कि सत्र के पहले दो हफ्तों के दौरान सदन ने 50 में से 40 घंटे खो दिए.

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